Sakat Chauth 2026: व्रत, पूजा विधि, कथा और महत्व – पूरी जानकारी एक ही जगह

Sakat Chauth 2026 का व्रत हर साल की तरह इस बार भी विशेष फलदायी और मनोकामना-पूर्ति करने वाला माना जा रहा है। यह व्रत मुख्य रूप से संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और परिवार के कल्याण के लिए रखा जाता है। इस दिन भगवान गणेश और चौथ माता की पूजा की जाती है और महिलाएँ संतान-सुख एवं रक्षा के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।


सकट चौथ को कई नामों से जाना जाता है –
तिलकुट चौथ, माघी चौथ, गणेश चतुर्थी, संकट हरण चतुर्थी आदि।

सकट चौथ व्रत कैसे रखें?

सकट चौथ के दिन महिलाएँ सुबह स्नान-ध्यान कर व्रत का संकल्प लेती हैं। दिनभर जल तक ग्रहण नहीं किया जाता और शाम को चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है।


सकट चौथ पूजा के लिए आवश्यक सामग्री
•गणेश जी की मूर्ति या चित्र
•दीपक व धूप
•रोली, चावल
•तिल और तिलकुट
•गुड़ और मूँगफली
•फल एवं मिठाई
•कलश और जल का लोटा

सकट चौथ पूजा विधि (स्टेप-बाय-स्टेप)

  1. प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लें
    2. चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर गणेश जी स्थापित करें
    3. कलश में जल भरकर रखें
    4. गणेश जी को दूर्वा, मोदक और तिलकुट अर्पित करें
    5. चौथ माता की भी पूजा करें
    6. संकट चौथ की कथा सुनें या पढ़ें
    7. शाम को चंद्रमा को दूध या जल से अर्घ्य दें
    8. चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है

सकट चौथ की व्रत कथा (संक्षेप में)

पौराणिक मान्यता के अनुसार एक बार भगवान शिव ने अपने दोनों पुत्रों —
गणेश और कार्तिकेय — की परीक्षा ली। भगवान शिव ने पूछा कि तुम दोनों में से सबसे बड़ा वीर कौन है? कार्तिकेय ने कहा कि वह देवताओं का सेनापति बना है और देवताओं की रक्षा कर सकता है। वहीं गणेश जी शांत रहे।


तब भगवान शिव ने दोनों से कहा —
जो पहले पृथ्वी का चक्कर लगाकर आएगा वही सच्चा वीर कहलाएगा।


कार्तिकेय तुरंत अपनी सवारी मोर पर बैठकर निकल गए, लेकिन गणेश जी ने माता-पिता शिव-पार्वती के चारों ओर सात फेरे लगाकर कहा —


मेरे लिए माता-पिता ही पूरी पृथ्वी के समान हैं।


उनकी बुद्धि से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता होने का आशीर्वाद दिया। उसी दिन से सकट चौथ का व्रत आरंभ माना जाता है।

सकट चौथ पर क्या करें और क्या न करें

करें
✔ निर्जला व्रत रखने का संकल्प लें
✔ चंद्रमा को अर्घ्य अवश्य दें
✔ गणेश जी को तिल, गुड़ और मोदक चढ़ाएँ


न करें
✘ बिना चाँद देखे व्रत न खोलें
✘ क्रोध न करें
✘ झूठ न बोलें
✘ किसी का अपमान न करें

सकट चौथ 2026 का धार्मिक महत्व

हिंदू मान्यता है कि इस व्रत को सच्चे मन से करने पर—
•संतान-सुख की प्राप्ति होती है
•बच्चे के जीवन से संकट दूर होते हैं
•घर-परिवार में सुख-शांति आती है
•बाधाएँ और विघ्न दूर होते हैं
इसलिए इसे संकट हरण चौथ भी कहा जाता है।

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