भारत की सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण पर्वतमालाओं में से एक — अरावली (Aravalli Mountain Range) इस समय सोशल मीडिया और समाचारों में बड़े पैमाने पर ट्रेंड कर रही है। लोग अब “#SaveAravalli” कैंपेन चला रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट के हाल के फैसले के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं।

🗻 क्या हुआ: सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया?
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अरावली की परिभाषा (definition) बदल दी है — इसमें अब केवल उन पहाड़ियों को अरावली मानने का निर्देश दिया गया है जिनकी ऊँचाई स्थानीय भूभाग से कम से कम 100 मीटर ऊपर है। इसके अलावा, दो पहाड़ियों को सीरीज यानी पर्वतमाला तभी माना जाएगा जब वे एक-दूसरे से 500 मीटर की दूरी से कम हों।
इतना होता है कि इस नियम के लागू होने पर अरावली के करीब 90% हिस्से को “अरावली से बाहर” मान लिया जाएगा। इससे उन इलाकों पर पहले जैसा पर्यावरण संरक्षण नहीं मिलेगा।
📉 किस वजह से इतना विवाद?
🔹 पर्यावरणविद, एक्टिविस्ट और स्थानीय लोग इस फैसले से बहुत चिंतित हैं।
क्योंकि:
90% अरावली अब संरक्षण से बाहर हो सकती है।
इससे खनन (mining), ढ़ांचा निर्माण और अतिक्रमण बढ़ सकता है।
जल स्रोत (water recharge), जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी को भारी नुकसान का खतरा है।
📍 अरावली न सिर्फ पहाड़ियाँ हैं, बल्कि यह दिल्ली-एनसीआर तक के क्षेत्र को रेगिस्तान की गर्मी, धूल और वायु प्रदूषण से बचाने वाला एक प्राकृतिक ढाल भी है।
📣 लोगों का रिएक्शन और विरोध
✔️ #SaveAravalli अभियान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
✔️ कई जगह नागरिक प्रदर्शन भी हुए हैं।
✔️ राजस्थान जैसे राज्यों में पर्यावरणविद और स्थानीय लोगों के साथ साथ राजनीतिक हस्तियाँ भी समर्थन में आई हैं।
✔️ लोगों का कहना है कि अगर अरावली खो जाएगी तो इससे जल संकट, मौसमीय असंतुलन, वायु प्रदूषण और जैविक विविधता को भारी नुकसान होगा।
🌍 अरावली का महत्त्व ( Aravalli Mountain Range, अरावली पर्वतमाला)
📌 अरावली पर्वतमाला भारत की सबसे पुरानी पर्वतमालाओं में से एक है। यह गुजरात से दिल्ली तक फैली हुई है, और जल आपूर्ति, मिट्टी की नमी, बेमौसम हवाओं से सुरक्षा, जंगलों और कई जीवों के लिए आवास प्रदान करती है।
✔️ यह थार रेगिस्तान के विस्तार को रोकती है।
✔️ यह कई नदियों का स्रोत भी है।
✔️ भूमि का तापमान नियंत्रित रखने में मदद करती है।
🔚 निष्कर्ष
हाल के फैसले ने अरावली के अस्तित्व को बड़ा विवादित मुद्दा बना दिया है। लोग डर रहे हैं कि अगर इस नई परिभाषा को अपनाया गया तो:
हजारों हेक्टेयर भूमि अब “अरावली” नहीं मानी जाएगी।
पर्यावरणीय संरक्षण कमजोर होगा।
अतिक्रमण और खनन को बढ़ावा मिलेगा।
इसलिए “अरावली पर्वतमाला क्यों महत्वपूर्ण है” और “क्यों इस पर निर्णय से विवाद उठ रहा है” — ये सवाल तेजी से चर्चा में हैं